कब किस मोड़ पर जीवन को नई दिशा मिल जाती है, पता नहीं चलता है। हर दिन हमारे लिए खास होता है पर कुछ दिन बेहद खास होते हैं। उसे खास बनाने में अपनो का साथ जरूर होता है। यह अतिश्योक्ति नहीं है, मेरे लिए शनिवार सबसे अहम दिन रहा। मेरे जीवन को शनिवार ने बहुत बदल दिया। मैंने शनिवार को बहुत सकारात्मक लिया। इस दिन के लिये मेरे मन में नकारात्मक कभी नहीं रही। नकारात्मकता व्यक्ति को निराशा की तरफ ले जाती है, सकारात्मक जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
आज सुबह फ़ोन घनघनाया। मैं सोच रहा था कि इतनी सुबह मां का कॉल कैसे। मां को पता है कि मैं देरी से उठता है, उसके बाद भी। मां ने हालचाल पूछने के बाद मुस्कुराहट के साथ पूछा कि शनिवार का उपवास क्यों नहीं करता है। तेरा भाई उपवास करने के लिए कह रहा है। आज से इसका ध्यान रखना। शनिवार तेरे लिए अच्छा दिन है, तो उपवास किया कर। मैंने कहा कि मां मेरे लिए कार्य ही पूजा है। कार्य के चक्कर में शनिवार को भूल जाता हूं। बस इतनी सी बात से बातों का सिलसिला खत्म हुआ। दोस्त को कहा कि मां मेरी कितनी फ्रिक करती है। शनिवार अब मेरे लिए और अधिक मूल्यवान हो गया था। इस दिन ने मेरी खुशी को दुगुना, तिगुना कर दिया। मां का दिलाया यह संकल्प हमेशा याद रहेगा।
आज सुबह फ़ोन घनघनाया। मैं सोच रहा था कि इतनी सुबह मां का कॉल कैसे। मां को पता है कि मैं देरी से उठता है, उसके बाद भी। मां ने हालचाल पूछने के बाद मुस्कुराहट के साथ पूछा कि शनिवार का उपवास क्यों नहीं करता है। तेरा भाई उपवास करने के लिए कह रहा है। आज से इसका ध्यान रखना। शनिवार तेरे लिए अच्छा दिन है, तो उपवास किया कर। मैंने कहा कि मां मेरे लिए कार्य ही पूजा है। कार्य के चक्कर में शनिवार को भूल जाता हूं। बस इतनी सी बात से बातों का सिलसिला खत्म हुआ। दोस्त को कहा कि मां मेरी कितनी फ्रिक करती है। शनिवार अब मेरे लिए और अधिक मूल्यवान हो गया था। इस दिन ने मेरी खुशी को दुगुना, तिगुना कर दिया। मां का दिलाया यह संकल्प हमेशा याद रहेगा।
जब कुछ अच्छा होता है, तो सोचता हूं...आखिर आज ही क्यूं। फिर अनायास ही पता चलता है कि आज तो शनिवार था। तब तब दिन ढल चुका होता है।
मां का कॉल एवं शनिवार का दिन होने के कारण सब कुछ अच्छा होता गया उसके बाद बहुत अच्छा। इसे संयोग कहे या कुछ ओर। आज मेरे लिए स्पेशल डे था। ऐसा दिन कि एक पल के लिए भी मुस्कान मेरे चेहरे से नहीं छीनी। आॅफिस में कार्य के दौरान भी बार बार सहयोगी ने मेरी मुस्कुराहट को बढ़ा दिया। मेरी मुस्कुराहट से उनके चेहरे पर भी मुस्कुराहट रही। जब सबसे पहले कॉल आया। तो बधाइयों का तांता लग गया। यह अनवरत जारी रहा। सबकी जुबां पर यही शब्द थे ग्रेट, गजब कर दिया यार, शानदार, इतने कम समय में, बहुत सही निर्णय।
कुछ खास मित्रों ने इस पल को खास बना दिया। सोचा नहीं था कि यह शनिवार मेरे लिए इतना खास हो जाएगा। सकारात्मकता तो हमेशा रही, पर इसकी उम्मीद नहीं थी। उम्मीद से बढ़कर दे दिया। कहते है कि भगवान दिखाई नहीं देता है। पर यह सच नहीं है। भगवान मां के रूप में हमे कुछ संकल्प दिलाने आया। अपने आप से संकल्प लेने की सीख दे गया। मेरे इस संकल्प ने मेरी ख़ुशी को बढ़ा दिया...आज वाकई जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी मिली बहुत कम समय में।
बहुत परिचित व्यक्ति ने कहा कि तुम्हें यह सिर्फ तुम्हारी मेहनत के कारण मिल है, और किसी को मिलना संभव नहीं। कहा जाता है कि कार्य ही पूजा है, यह स्वयं सिद्ध है। हर ख़ुशी के पीछे मां है...मां को शायद मुझसे पहले पता चल गया था कि आज कोई खास दिन है, नहीं तो इतनी जल्दी कभी कॉल नहीं आता।
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सिद्धार्थ शाह



बहुत ही उमदा लिखा है आपने...आशा है आगे भी आपके दिन अच्छे होते रहेंगे। लेकिन कौन सी ऐसी बात है जिस कारण आप इतने अधिक खुश हैंं...उसका जिक्र तो आपने किया ही नहीं है।
ReplyDeletebahut achchhe
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