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गांव अपना.....शहर सपना.....

थडियो, गलियों में घूमता बचपन...सपनों से नहीं वास्ता

जिंदगी के तीन साल...........निराशा से निकली एक उम्मीद

राजनीति की टेढ़ी मेढ़ी गलियां

लोकतंत्र के उत्सव में किन्नरों को मिला तोहफा