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अज्ञातवास से घर वापसी..

ब्रांडेड ज़माने में फीका पड़ा चेहरा...

अब मुझे भी नमस्कार करने लगे. . .

और चाय ठंडी पड़ गयी....

यह कैसी राजनीति....

ताला तोड़़ दावत-ए-भोजन....

जख्म कुरेद गयी सरकारी हवा....

चाॅकलेट चोरी पकड़ी गई.......